तेरी दोस्ती में तुजे क्या पैगाम दू !
तेरा रूप है क्या,क्या मै इससे नाम दू !!
तेरी कदर करू मै केसे,क्या तुजे सलाम दू !
तेरी खुशबू हर जगह है,क्या तुजे फूलो की फुलवारी कहू !!
एक कड़ी थी रिस्तो की जो कमजोर पड़ी थी !
खड़ा था मै कही और मेरी जान कही और अडी थी !!
तेरे साथ जुडी थी वो विशवास की डोर थी !
जहा प्यार था अपनापन था वहा तू खड़ी थी !!
एक कहानी थी मेरी जो हकीकत मै बदल गयी !
लडखडाई हुयी मेरी जिन्दगी तेरी डोर से संभल गयी !!!!!
Thursday, September 3, 2009
तुम्हारा साथ ....
तुम्हारा साथ रहा लम्बा और भरा-भरा
उछाह के वक़्तों में मिले थे
अवसादों की तलहटियों में सुर मिलाते रहे
सुनाया तुमने जीवन का लगभग हर संभव संगीत
प्रेम में डूबे दिनों में ग़ज़लें सुनीं इतनी बार कि
मेंहदी हसन का गला बैठ गया
नींद उन दिनों उड़ी रहती थी
तुम रोमानी लोरियाँ बन बजते थे ........
और क्या कहूँ दोस्त .... सब कुछ तो तेरा ही दिया हुआ है .....facebook/com
उछाह के वक़्तों में मिले थे
अवसादों की तलहटियों में सुर मिलाते रहे
सुनाया तुमने जीवन का लगभग हर संभव संगीत
प्रेम में डूबे दिनों में ग़ज़लें सुनीं इतनी बार कि
मेंहदी हसन का गला बैठ गया
नींद उन दिनों उड़ी रहती थी
तुम रोमानी लोरियाँ बन बजते थे ........
और क्या कहूँ दोस्त .... सब कुछ तो तेरा ही दिया हुआ है .....facebook/com
राहें बहुत सीधी सरल पर ....
राहें बहुत सीधी सरल पर ................
होने को तो होता है पर
कुछ का कुछ निशचित हो जाता है
आते आते हाथ फिसलकर मछली जैसा हल खो जाता है.
अपने ही वारों से, अपने को बचने की,
राह कठिन है मेंहदी सा पीस कर रचने की .
यूँ तो बुत सरल सीधी
पर राही यंहा भ्रमित हो जाता है.
भूले सिरे से इसकी असफलता ही उतनी,
और साथ में नयी शिराएँ और वो धमनी
आते जब परिणाम सामने
सृष्टा स्वतः चकित हो जाता.
अपने हाटों कात लिया, लेकिन फिर बुनना,
बीच - बीच में वाजिब कहना, वाजिब सुनना .......
राहें बहुत सरल सीधी पर
राही यंहा भ्रमित हो जाता ..........................
होने को तो होता है पर
कुछ का कुछ निशचित हो जाता है
आते आते हाथ फिसलकर मछली जैसा हल खो जाता है.
अपने ही वारों से, अपने को बचने की,
राह कठिन है मेंहदी सा पीस कर रचने की .
यूँ तो बुत सरल सीधी
पर राही यंहा भ्रमित हो जाता है.
भूले सिरे से इसकी असफलता ही उतनी,
और साथ में नयी शिराएँ और वो धमनी
आते जब परिणाम सामने
सृष्टा स्वतः चकित हो जाता.
अपने हाटों कात लिया, लेकिन फिर बुनना,
बीच - बीच में वाजिब कहना, वाजिब सुनना .......
राहें बहुत सरल सीधी पर
राही यंहा भ्रमित हो जाता ..........................
Tuesday, September 1, 2009
यादें कुछ खास है ........
यादें कुछ खास है ........
हमारा दिमाग चिंताओं और भविष्य की योजनाओं से दब गया है. इस दबाव से हम छोटे सुखों को थमने की कोशिश ही नहीं करते जो कि हमारी जिंदगी को जगमजा देते हैं . ये छोटे छोटे खुशियाँ हमारी जिंदगी में बार बार आते हैं, लेकिन हम बड़े आशीर्वादों के इंतजार में इन्हें अनदेखा कर देते हैं . जिन छोटे छोटे खुशियों को, छोटे छोटे सुखों को हमने खो दिया है, उन्हें वापस तो नहीं लाया जा सकता, लेकिन आने वाले छोटे छोटे सुखों को, छोटे छोटे खुशियों को हम तहेदिल से स्वागत कर सकते हैं. उन बीते हुए पलों को याद करके उस अनंत आनंद को प्राप्त कर सकते हैं, जिस आनंद को हर इंसान तरसता है ...........
उन्ही कुछ बीते हुए पलों की कड़ी में मैं दिनांक २६ अगस्त, २००९ को मैं उस जगह गया जन्हा मेरा बहुत की प्यारे पल हैं, ये वो जगह है जिन्हें मैं अपने जीवन में कभी भी नहीं भूल सकता.......
ये '' अमरकंटक'' है ........ छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जगह में स्थित है....
यंहा मैंने अपने दोस्तों के साथ समय बिताया था..... दिनांक ०४ जून, २००४. मुझे अभी भी याद है वो प्यारे पल ......
मेरा प्यारा दोस्त दीपक, निशा, हरिश, प्रमोद, रजनीश, नरेश ........ और साथ में मेरी भूतपूर्व प्रेमिका कविता भी साथ थी ......
आज भी मुझे वो जगहों याद है ....... अच्छी तरह याद है .........
इन जगहों को याद कर मेरा रोम रोम खिल गया ...... सच कहूँ तो मैं भावविभोर हो गया.... सीधे शब्दों में मेरी आँखें भर आई .......
कविता तो मुझे नहीं मिली ....... शायद मेरे ही प्यार में कुछ कमी रही होगी!!!!
पर आज भी मैं उसके प्यार को तहेदिल से प्यार करता हूँ ......
रही बात दीपक की, वो तो मेरा यारा दिलदार है, उसके बिना मैं अपनी इस मुकाम को नहीं पहुँचता...... सीधे शब्दों में मेरी दूसरी पारी उसकी ही देन है ........
कुछ फोटो अमरकंटक की ........
सोन मुंडा...... सोन मुंडा......


हमारा दिमाग चिंताओं और भविष्य की योजनाओं से दब गया है. इस दबाव से हम छोटे सुखों को थमने की कोशिश ही नहीं करते जो कि हमारी जिंदगी को जगमजा देते हैं . ये छोटे छोटे खुशियाँ हमारी जिंदगी में बार बार आते हैं, लेकिन हम बड़े आशीर्वादों के इंतजार में इन्हें अनदेखा कर देते हैं . जिन छोटे छोटे खुशियों को, छोटे छोटे सुखों को हमने खो दिया है, उन्हें वापस तो नहीं लाया जा सकता, लेकिन आने वाले छोटे छोटे सुखों को, छोटे छोटे खुशियों को हम तहेदिल से स्वागत कर सकते हैं. उन बीते हुए पलों को याद करके उस अनंत आनंद को प्राप्त कर सकते हैं, जिस आनंद को हर इंसान तरसता है ...........
उन्ही कुछ बीते हुए पलों की कड़ी में मैं दिनांक २६ अगस्त, २००९ को मैं उस जगह गया जन्हा मेरा बहुत की प्यारे पल हैं, ये वो जगह है जिन्हें मैं अपने जीवन में कभी भी नहीं भूल सकता.......
ये '' अमरकंटक'' है ........ छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जगह में स्थित है....
यंहा मैंने अपने दोस्तों के साथ समय बिताया था..... दिनांक ०४ जून, २००४. मुझे अभी भी याद है वो प्यारे पल ......
मेरा प्यारा दोस्त दीपक, निशा, हरिश, प्रमोद, रजनीश, नरेश ........ और साथ में मेरी भूतपूर्व प्रेमिका कविता भी साथ थी ......
आज भी मुझे वो जगहों याद है ....... अच्छी तरह याद है .........
इन जगहों को याद कर मेरा रोम रोम खिल गया ...... सच कहूँ तो मैं भावविभोर हो गया.... सीधे शब्दों में मेरी आँखें भर आई .......
कविता तो मुझे नहीं मिली ....... शायद मेरे ही प्यार में कुछ कमी रही होगी!!!!
पर आज भी मैं उसके प्यार को तहेदिल से प्यार करता हूँ ......
रही बात दीपक की, वो तो मेरा यारा दिलदार है, उसके बिना मैं अपनी इस मुकाम को नहीं पहुँचता...... सीधे शब्दों में मेरी दूसरी पारी उसकी ही देन है ........
कुछ फोटो अमरकंटक की ........
सोन मुंडा...... सोन मुंडा......


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